#आज_की_पुस्तक : औरंगजेब का शासन हिंदुस्तान और हिंदुओं के लिए एक अंधेरा लेकर आया था, लेकिन इसी अंधेरे को चीड़ कर मराठा, मेवाड़, सिक्ख, जाटों और कुछ शूरवीरों ने वह प्रकाश फैलाया कि औरंगज़ेब के बाद मुगलिया सल्तनत का अंत हो गया।
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल दिलीप सिंह ने उन प्रकाश स्तंभों को एक जगह अपनी पुस्तक 'प्रतिरोध' में समेटने का काम किया है। यह एक ऐसा प्रतिरोध था, जो दिख तो अलग-अलग रहा था, लेकिन लक्ष्य एक था- मुगल सल्तनत का खात्मा।
छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा राज सिंह मेवाड़, तारा बाई, बंदा बहादुर, दुर्गा दास राठौड़, धना सिंह, जैसे सूरमाओं के प्रहार ने औरंगजेब के बाद मुगल साम्राज्य की अंत निश्चित कर दिया।
यह पुस्तक हमारे अंदर शौर्य जगाती है और इस आशा का संचार करती है कि हम जैसे साधारण मनुष्य भी यदि ठान ले तो किसी भी पर्वत को हिला सकते हैं! यह पुस्तक अंग्रेजी में है, लेकिन बेहद पठनीय है।
पुस्तक लिंक: https://www.kapot.in/product/pratirodh-the-resistance/
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